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"महानुभाव पंथ में स्त्री जीवन" पर व्याख्यान का आयोजन.

"महानुभाव पंथ में स्त्री जीवन" पर व्याख्यान का आयोजन.

• 'लीलाचरित्र' से ही स्त्री मुक्ति. 
"साप्ताहिक जनता की आवाज"
 संवाददाता.

नागपूर/भंडारा :- राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के भगवान श्री चक्रधर स्वामी अध्यासन की ओर से 'महानुभाव पंथ में स्त्री जीवन ऐतिहासिक, साहित्यिक, सामाजिक और आधुनिक संदर्भ' विषय पर एक दिवसीय चर्चासत्र आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता डॉ. शामराव कोरेटी ने की. डॉ. संजय जगताप, हंसराज खामनीकर तथा अध्यासन प्रमुख डॉ. भारतभूषण शास्त्री उपस्थित थे. डॉ. जगताप ने कहा कि प्राचीन काल में मातृसत्तात्मक व्यवस्था थी जो समय के साथ समाप्त हो गई. 12वीं शताब्दी में सर्वज्ञ श्रीचक्रधर स्वामी ने पहली बार स्त्रियों के अधिकारों के लिए मार्ग प्रशस्त किया. उन्होंने स्त्रियों को अपने समक्ष बैठाकर ज्ञान प्रदान किया जिससे महदंबा, हिराईसा, कमलाउसा जैसी विदुषी स्त्रियां सामने आईं. पंडित म्हाइंभट द्वारा रचित 'लीलाचरित्र' में स्त्री मुक्ति का पहला दस्तावेज मिलता है. द्वितीय सत्र में शोधपत्र प्रस्तुत किए गए जिसकी अध्यक्षता डॉ. अर्चना ठाकरे ने की. इस सत्र
में डॉ. प्रतिभा कोकाटे, डॉ. वनिता मेश्राम, प्रा. माधुरी - ढोंगे, डॉ. पद्मिनी दुरुगकर, डॉ. विजया राऊत, प्रा. - स्मिता शहाणे और मैथिली पालेकर ने विभिन्न विषयों - पर शोधपत्र प्रस्तुत किए. इन प्रस्तुतियों में महानुभाव पंथ में स्त्रियों की सामाजिक चेतना, साहित्यिक -योगदान और जीवन में आए परिवर्तन पर प्रकाश डाला गया. संचालन प्रा. स्मिता शहाणे, डॉ. दीपा - हटवार और रजनी गजभी ने किया, जबकि आभार - तृषाल रामटेके, जागृति शिरसाठ और आनंदराव गजभिये ने माना.

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