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  कविता.. (गाण)चाल साधी

कविता.. (गाण)चाल साधी

      

रमा हरपली-अर्थ पोटान
 रमा येग ये - आता परतून //धृ //

साथ दिली ग मोलाची मला 
जिद्य चिकाटी होती ग तुला 
रमा हरपली --अर्ध पोटान //1//

जगु कसा ग तुझा विना मी
 हे लेखरे सोनळू कसा ग मी
 रमा हरपली--अर्ध पोटान //2//

पती तुझाग ग आहे बेरिस्टर 
रमा सोळून चालली अर्थवर
 रमा हरपली-अर्थ पोटान //3//
काय हवे ग सांग रमा तु 
काय चुकले ग बोलग रमा तु
 रमा हरपली अर्ध पोटान //4//

जेव्हा संजेला नव्हत ग पिट 
पाणी पिऊन गौतमा भरल पोट 
रमा हरपली --अर्ध पोटान //5//

                    कवि गौतम धोटे
                         लोककवी 
                  आवापुर जि.चंद्रपूर 

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