योगी शासन में ब्राह्मण अछूत!.
गुरुवार, 22 जनवरी 2026
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साप्ताहिक जनता की आवाज"
न्यूज नेटवर्क
• प्रदेश अध्यक्ष की चेतावनी के बाद भाजपा MLA में सुलग रहा विद्रोह.
• पुलिस अफसर एट्रोसिटी एक्ट लगा देते हैं.
.लखनऊ :- ब्राहमण जनप्रतिनिधि अधिकारियों के निशाने पर हैं. एससी/एसटी एक्ट का शिकार सबसे ज्यादा वही समुदाय बनाया जा रहा. झूठे केस लगते हैं. ४० साल के बुजुर्ग पर एससी/एसटी एक्ट लगा दिया जाता है. सब जानते हैं कि फंसाया है. थाने जाओं, तो सरनेम में ही आधा दोषी मान लेते हैं अधिकारीहनते तो हम जनता को आवाज कैसे बनेंगे, सरकार को लगता है कि हमें किसी ने बरगलाया है, ती गलत हैं. अनसुना कर दो और शिकायत आए तो बढ़ा-चढ़ाकर लिखो और बोलो. क्षेत्र में जवाब हमें देना पड़ता है. आजकल ये चल रहा है कि ब्रहमण पीड़ित हो तो
उत्तर प्रदेश में जातिगत राजनीति हमेशा से सुर्खियों में रही, लेकिन यही अब भाजपा के लिए सिरदर्द बनती दिख रही है. बीते माह माना राजपूत और उनके बाद ब्राहमण विधायकों की बैठक ने पार्टी आलाकमान का माथा उनका दिया. 23 दिसबर को लखनऊ में 50 से ज्यादा बाक्ष्मण विधायक और एमएलसी कुशीनगर के विधायक पीएन पाठक के घर जुटे. समाज के कई मुद्दों पर बातें हुई. लेकिन, पाष्टर्टी हाईकमान नाराज हो गया. यूपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इसे अनुशासनहीनता और आगे ऐसा नहीं करने की हिदायत दे डाली. इस बैठक में तय हुआ था कि हर महीने बैठक की जाएगी. समाज का एक फंड तैयार किया जाएगा, जिससे सामाजिक गतिविधियों को क्रियान्वित किया जाएगा. बैठक को लेकर पार्टी अध्यक्ष की चेतावनी के बाद अब तक अगली बैठक को लेकर कोई सुगबुगाहट
नहीं है, लेकिन अंदरखाने में चेतावनी पर विधायकों के विद्रोही तेवर जरूरी दिखाई दे रहे हैं. उनका कहना है जब राजपूत और पिछड़ों की बैठक में अनुशासन दिख रहा तो हम कैसे अनुशासनहीन हो गाए, सरकार की तरह ही संगठन भी अब हमें आछूत मानने लगा है.
अपमान के खिलाफ खड़े होंगे: अगली बैठक को लेकर उन्होंने बताया कि प्लान था हर महीने बैठेंगे. फिलहाल नहीं लग रहा कि दूसरी बैठक होगी
अगर प्रशासन इस बैठक से डरा या उसे कोई चुनौती लगी, ती लगनी भी चाहिए, राज्य में हम करीब 12% हैं. अगर ब्राह्मण विधायक इग्नोर महसूस करता रहा, तो नुकसान तय है. यूपी में अधिकारी के पास जाओ तो लगता है. कम्युनिटी का बोलबाला है, उससे संख्या जैसे हैरिस्वत ही नहीं है हमारी जिस में दोगुने हैं. ऊपर बैठे लोगों को लगता है। कि आरमण कहां जएगा तो वो जाएगा नाहीं, लेकिन घर तो बैठ सकता है.
सरकार सम्मान नहीं देती, अफसर बदसलूकी करते हैं
प्रदेश में बोलने किन अपनी बात रखी क्योंकि पार्टी मना किया है, विधायकों का कहना है कि समुदाय के लोगों का साथ बैठना गुनाह सीक्रेट मीटिंग ची, न बगावत की प्रसामिग समाज की चितार लेकर बैठे है. दैन अगली बार बता देंगे कि बैड रहे हैं. फिर कोई आपति नहीं होगी न. जानता हूं फिर भी होगी कवक ग्रहण अभी जबरी अकूत है. रोज उपेक्षा झेल रहे हमें जाटकर खूप करा दिया गाह पर हमण जन्ध्रतिनिधि उसका गुस्सा आज नहीं तो कल फूटेगा समाज और पार्टी में जो अपमान सह रहा. हम बुद्धिबल और.संख्या बल मे कम नही है .क्षत्रिय कुरमे दलित कोई भी समाज साथ मे बढ सकता है.तो ब्राह्मण के बेटने मे क्या गलत है.
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