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राज्य में 900 फर्जी दिव्यांग संस्थाओं की मान्यता रद्द, सख्त प्रशासनिक कार्रवाई से मचा हड़कंप.

राज्य में 900 फर्जी दिव्यांग संस्थाओं की मान्यता रद्द, सख्त प्रशासनिक कार्रवाई से मचा हड़कंप.



"साप्ताहिक जनता की आवाज" 
न्युज नेटवर्क 

मुंबई :- राज्य के दिव्यांग कल्याण विभाग द्वारा की गई व्यापक जांच और प्रशासनिक छानबीन के बाद पिष्ठले 13 वर्षों में कुल 900 दिव्यांग कल्याण संस्थाओं की मान्यता रद्द कर दी गई है। इनमें से 363 संस्थाओं पर बीते एक वर्ष के दौरान ही कार्रवाई की गई। यह कदम राज्य में दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा और सरकारी अनुदान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। विभाग के सचिव तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी संस्था को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।

दिव्यांग कल्याण व्यवस्था में बड़ा सुधार अभियान.

राज्य में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिव्यांग व्यक्ती अधिनियम लागू है। इस अधिनियम के तहत दिव्यांगों के लिए कार्य करने वाली प्रत्येक संस्था का दिव्यांग कल्याण आयुक्तालय में पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण के बिना किसी भी संस्था को दिव्यांगों के लिए आवासीय, शैक्षणिक या पुनर्वास संबंधी सेवाएं संचालित करने की अनुमति नहीं है। हालांकि जांच में सामने आया कि अनेक संस्थाएं या ती बिना वैध पंजीकरण के संचालित हो रही थीं या फिर पंजीकरण के बावजूद नियमों का गंभीर उल्लंघन कर रही थीं। कई संस्थाओं ने सरकारी अनुदान प्राप्त किया, लेकिन उस धन का उचित उपयोग नहीं किया गया। कुछ मामलों में तो रिकॉर्ड पर दर्शाए गए लाभार्थियों की संख्या और वास्तविक लाभार्थियों की संख्या में भारी अंतर पाया गया।
एक वर्ष में 363 संस्थाओं पर गिरी गाज.

विभाग द्वारा बीते वर्ष में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 363 संस्थाओं की मान्यता रद्द की गई। इन संस्थाओं में अधिकांश मामलों में अनियमितताएं गंभीर पाई गई। अगस्त 2025 में सचिव पद संभालने के बाद से प्रशासनिक सख्ती और निरीक्षण की प्रक्रिया तेज की गई। जिला स्तर पर जांच समितियों का गठन किया गया, दस्तावेजों की जांच की गई और मौके पर निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया। जांच में पाया

गया कि कई संस्थाएं केवल कागजों पर सक्रिय थीं। रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में दिव्यांग छात्रों या लाभार्थियों को दर्शाया गया, लेकिन स्थल निरीक्षण में वे उपस्थित नहीं मिले। कुछ संस्थाओं ने दिव्यांगों को मिलने वाली आवश्यक सुविधाएं जैसे विशेष शिक्षण सामग्री, चिकित्सा सुविधा, पोषण आहार, सहायक उपकरण-सिर्फ दस्तावेजों में दर्शाई, वास्तविकता में अभाव था।
सरकारी अनुदान के दुरुपयोग की आशंका.

राज्य सरकार दिव्यांग संस्थाओं को वेतन अनुदान, भोजन अनुदान, शिक्षण सामग्री, पुनर्वास सहायता आदि के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ संस्थाओं ने कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन नहीं दिया, जबकि सरकार से वेतन अनुदान नियमित रूप से प्राप्त किया जा रहा था।

ऐसे मामलों में अब वित्तीय जांच की भी संभावना है। जिन संस्थाओं ने अनुदान लिया है, उनसे यह स्पष्टीकरण मांगा जाएगा कि धन का उपयोग किस प्रकार किया गया। यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो वसूली और दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

28 फरवरी 2026 तक अनिवार्य पंजीकरण.

दिव्यांग क्षेत्र में कार्यरत सभी संस्थाओं को 28 फरवरी 2026 तक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य किया गया है। यह कदम राज्य में एक पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। समयसीमा के

भविष्य की कार्ययोजना

दिव्यांग कल्याण विभाग ने आगामी महीनों के लिए विस्तृत कार्ययोजना

तैयार की है। इसमें शामिल हैं

• सभी पंजीकृत संस्थाओं का वार्षिक निरीक्षण

•अनुदान वितरण से पहले भौतिक सत्यापन

• लाभार्थियों का आधार आधारित सत्यापन

शिकायत निवारण तंत्र की मजबूत करना दिव्यांगों और उनके अभिभावकों से प्रत्यक्ष फीडबैक लेना

भीतर पंजीकरण न करने वाली संस्थाओं के खिलाफ अधिनियम की धारा 91 के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल पंजीकरण से प्रत्येक संस्था का अद्यतन डेटा उपलब्ध रहेगा, निरीक्षण प्रक्रिया आसान होगी और अनियमितताओं पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। इससे दिव्यांगों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी संस्था को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए की गई है। कई मामलों में यह देखा गया कि दिव्यांगों के नाम पर अनुदान लिया जा रहा था, लेकिन वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल रहा था। दिव्यांग व्यक्तियों को शिक्षा, पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और सामाजिक समावेशन का अधिकार है। यदि संस्थाएं केवल आर्थिक लाभ के लिए कार्य कर रही हों, तो यह

मान्यता रद्द करने के प्रमुख कारण

जांच के दौरान निम्नलिखित प्रमुख अनियमितताएं सामने आईं

1) रिकॉर्ड में दर्शाए गए छात्रों और वास्तविक छात्रों की संख्या में अंतर

2) दिव्यांगों को कानूनन मिलने वाली सुविधाओं का अभाव

3) कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन न देना

4) सरकारी अनुदान का संदिग्ध उपयोग

5) संस्थाओं के प्रबंधन में आंतरिक विवाद

6) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन

7) बिना वैध पंजीकरण संस्था का संचालन

रद्द करने की कार्रवाई की गई।

इन सभी मामलों में संस्थाओं को पहले नोटिस जारी किए गए। स्पष्टीकरण संतोषजनक न मिलने पर मान्यता

दिव्यांगों के साथ अन्याय है। सरकार का उद्देश्य है कि केवल वही संस्थाएं संचालित रहें जो वास्तव में सेवा भाव से कार्य कर रही हैं।

सामाजिक क्षेत्र में पारदर्शिता की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक क्षेत्र में पारदर्शिता लाना अत्यंत आवश्यक है। कई वार समाजसेवा के नाम पर संस्थाएं स्थापित तो हो जाती हैं, लेकिन समय के साथ उनमें जवाबदेही की कमी आ जाती है। नियमित निरीक्षण, वित्तीय ऑडिट और डिजिटल निगरानी से ऐसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। यह कार्रवाई अन्य विभागों के लिए भी एक उदाहरण मानी जा रही है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दिव्यांगों के नाम पर कोई भी संस्था केवल कागजी खानापूर्ति न करे। सेवाओं की गुणवत्ता और वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच को प्राथमिकता दी जाएगी।
दिव्यांग क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता

राज्य में बड़ी संख्या में दिव्यांग व्यक्ति शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास सेवाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि संस्थाएं अपना दायित्व सही ढंग से न निभाएं तो इसका सीधा प्रभाव लाभार्थियों पर पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक है कि संस्थागत ढांचे को मजबूत किया जाए।

पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाकर सरकार ने उन संस्थाओं को भी अवसर दिया है जो ईमानदारी से कार्य करना चाहती हैं। समयसीमा के भीतर

पंजीकरण कर वे अपनी वैधता सुनिश्चित कर सकती हैं। विभाग की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि नियमों का पालन न करने वाली संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी संस्था को जिस उद्देश्य से मान्यता दी गई थी, वह उसका पालन नहीं कर रही है, तो उसकी अपात्रता तय है। बिना पंजीकरण संचालित होने वाली संस्थाओं को बंद किया जाएगा।

यह भी कहा गया है कि जिन संस्थाओं ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं और निगमों का पालन सुनिश्चित किया है, उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। उद्देश्य केवल व्यवस्था को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना है। राज्य में १०० फर्जी या नियमवाह्य दिव्यांग संस्थाओं की मान्यता रद्द किया जाना एक बड़ा प्रशासनिक कदम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार दिव्यांगों के अधिकारों के प्रति गंभीर है और सामाजिक कल्याण योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिवद्ध है। आगामी समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पंजीकरण प्रक्रिया कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है और नई व्यवस्था से दिव्यांग व्यक्तियों को कितना वास्तविक लाभ मिलता है। यदि निरीक्षण और जवाबदेही की प्रक्रिया लगातार जारी रही, तो निश्चित रूप से दिव्यांग कल्याण क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि समाजसेवा के नाम पर अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दिव्यांगों के अधिकारों से समझोता नाही किया जाएगा।

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