“शिवरायों का संघर्ष अन्याय के विरुद्ध था” – प्राचार्य राहूल डोंगरे.
सोमवार, 23 फ़रवरी 2026
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• शारदा विद्यालय, तुमसर में प्रतिपादन
दिगंबर देशभ्रतार
"साप्ताहिक जनता की आवाज"
तुमसर :- शारदा विद्यालय में छत्रपती शिवाजी महाराज जयंती के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य राहूल डोंगरे ने की, जबकि प्रमुख अतिथि के रूप में नितुवर्षा मुकुर्णे उपस्थित थीं। प्रारंभ में शिवरायों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने देशभक्ति का वातावरण निर्मित किया। आर्या मते, आरुषी मारबाडे एवं दर्शनी काहलकर ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। माही मेश्राम ने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। इच्छा मेश्राम, सेजल बांडेबूचे, अनुष्का राऊत, शानू हारकुडे और रागिणी वैद्य ने शिवरायों पर आधारित गीत प्रस्तुत कर उपस्थितों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन लिझा दामोदर हेडाऊ ने किया तथा आभार प्रदर्शन राम बोपचे ने किया।
कार्यक्रम की सफलता के लिए शिक्षकवृंद – ज्योती बालपांडे, दीपक गडपायले, श्रीराम शेंडे, संजय बावनकर, अशोक खंगार, अंकलेश तिजारे, विद्या मस्के, प्रीती भोयर, सारिका आठोडे, सुकांक्षा भुरे, श्रेया उरकुडे, नेहा बारई, बेनिता रंगारी, नारायण मोहनकर, दीपक बालपांडे एवं झनकेश्वरी सोनवाणे – ने विशेष परिश्रम किए।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य राहूल डोंगरे ने कहा कि छत्रपती शिवाजी महाराज का संघर्ष किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि अन्यायकारी सत्ता के विरुद्ध था। उनका स्वराज्य न्याय, समानता और लोककल्याण पर आधारित था। उन्होंने कहा, “शिवरायों ने किसानों की रक्षा की, महिलाओं का सम्मान सुनिश्चित किया और सभी समाज घटकों को न्याय प्रदान किया। यही कारण है कि वे संपूर्ण भारत के प्रेरणास्रोत हैं।”
प्रमुख अतिथि नितुवर्षा मुकुर्णे ने भी शिवरायों के कार्यों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में शिक्षकवृंद, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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