सिंटा कलाकारों के अधिकारों का मुद्दा पहुंचा मंत्रालय।
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026
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• सिंटा कलाकारों की सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण को लेकर गंभीर।
• सिंटा ने लेबर कोड में अधिकारों की लड़ाई को दी नई धार।
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न्यूज नेटवर्क
मुंबई :- मुंबई के मंत्रालय में 11,फरवरी, 2026 को एक अहम बैठक ने फिल्म इंडस्ट्री के भविष्य को नई दिशा देने की उम्मीद जगाई। सिंटा (Cine & TV Artistes’ Association) की अध्यक्ष पूनम ढिल्लों और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे ने महाराष्ट्र के माननीय श्रम मंत्री आकाश फुंडकर और श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात कर नए लेबर कोड के तहत कलाकारों के अधिकारों, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक संरक्षण पर विस्तृत चर्चा की। यह मुलाक़ात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि कलाकारों की आवाज़ को नीति-निर्माण के केंद्र तक पहुंचाने की एक सशक्त पहल थी।माननीय श्रम मंत्री आकाश फुंडकर की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित इस बैठक में प्रिंसिपल सेक्रेटरी (लेबर) श्रीमती इडजेस कुंदन, लेबर कमिश्नर डॉ. एच. पी. तुम्मोद, एडिशनल लेबर कमिश्नर भगवान अंधाले, प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीमती कुंदन, डिप्टी सेक्रेटरी श्रीमती रोशनी कदम पाटिल, सेशन जज और लीगल एडवाइजर श्री सुनील शर्मा, डिप्टी सेक्रेटरी श्रीमती रोशिनी के. पाटिल, डिप्टी सेक्रेटरी स्वप्निल कपाडनिस और सहित श्रम मंत्रालय की समर्पित टीम उपस्थित रही।
बैठक का मुख्य उद्देश्य था—
केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए नए लेबर कोड के अंतर्गत महाराष्ट्र में बनाए जा रहे नियमों में फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों, तकनीशियनों और अन्य श्रमिकों के वैध अधिकारों को प्रभावी रूप से शामिल करना। नई लेबर कोड में ऑडियो-विज़ुअल वर्कर्स के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, उन पर विस्तार से चर्चा हुई। इन मुद्दों में शामिल थे: समय पर भुगतान,सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन और कार्य के निर्धारित घंटे, कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन।
पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने फिल्म इंडस्ट्री के विभिन्न विभागों से जुड़े कलाकारों, तकनीशियनों और वर्कर्स की जमीनी समस्याओं को मंत्री के सामने रखा। उन्होंने बताया कि असंगठित ढांचे के कारण कई कलाकारों को समय पर भुगतान, अनुबंध की स्पष्टता और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है।मंत्री आकाश फुंडकर ने स्पष्ट किया कि नए लेबर कोड में ऑडियो-विज़ुअल वर्कर्स के लिए कानूनी संरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों और संबंधित कर्मियों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे नियमों की अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले सार्वजनिक रूप से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। CINTAA अध्यक्ष को निर्देश दिए गए कि वे ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर अपने सुझाव और आपत्तियां औपचारिक रूप से प्रस्तुत करें।मंत्री ने आश्वासन दिया कि CINTAA की ओर से प्राप्त सुझावों के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री के अन्य प्रतिनिधियों—निर्माताओं और तकनीशियनों—की राय को भी गंभीरता से विचार में लिया जाएगा। बैठक के अंत में पूनम ढिल्लों ने अनुरोध किया कि श्रम मंत्रालय की टीम और सिंटा के सदस्यों के बीच एक विस्तृत संवाद सत्र जल्द आयोजित किया जाए, ताकि कलाकारों की समस्याओं को सीधे समझा जा सके और उन्हें नए लेबर कोड के प्रावधानों की जानकारी भी दी जा सके।यह पहल न केवल जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि कलाकारों को अपने अधिकारों के प्रति सशक्त भी बनाएगी।बता दें कि फिल्म इंडस्ट्री लंबे समय से अनौपचारिक कार्यप्रणाली, अनिश्चित भुगतान और सामाजिक सुरक्षा के अभाव जैसी चुनौतियों से जूझती रही है। ऐसे में लेबर कोड के तहत कानूनी संरक्षण और स्पष्ट नियमों का निर्माण एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। मंत्रालय की यह बैठक केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सिनेमा जगत के हजारों कलाकारों और तकनीशियनों के लिए उम्मीद की नई किरण है—जहां उनकी मेहनत को न सिर्फ तालियां मिलेंगी, बल्कि कानून का मजबूत सहारा भी। अगर ये प्रावधान प्रभावी रूप से लागू होते हैं, तो भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले कलाकारों के लिए यह सचमुच एक “नई शुरुआत” होगी जहां रचनात्मकता के साथ सुरक्षा और सम्मान भी सुनिश्चित होगा।
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