इस चेहरे को ध्यान से देख लीजिए, किसी मीडिया चैनल पर न तो इनके बारे में चर्चा हो रही है और न ही देश में कोई बहस। संक्षेप में समझाता हूँ!..
शनिवार, 23 मई 2026
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प्रविण शेन्डे
"साप्ताहिक जनता की आवाज"
तिरोडा :- इनका नाम अहमद बुहारी है, पढ़े-लिखे अरबपति हैं, उनकी बड़ी कोयला कंपनी है, तमिलनाडु में 1200 मेगावाट का थर्मल प्लांट है। अब 4 मार्च 2022 को ईडी इन्हें गिरफ्तार कर लेती है, जिसके बाद वे तुरंत कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं और बताते हैं कि वे पूरी तरह से निर्दोष हैं, उन्हें जबरन फंसाया जा रहा है और असल खेल कुछ और ही है। किंतु तमाम कोर्ट-कचहरी के बीच एजेंसियां उन्हें 2.7 सालों तक जेल में रखती हैं।
इस बीच उनकी कंपनी भारी वित्तीय घाटे में आ जाती है, जो कि बड़ा स्वाभाविक है, यदि किसी भी कंपनी का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति जेल में होगा 2.7 सालों तक तो कोई भी कंपनी ज्यादा समय तक सर्वाइव नहीं कर सकती। इनके साथ भी यही हुआ, इनकी कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया गया और अब असल कहानी शुरू होती है। इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया जाता है, और कौन करता है? मोदी जी के अति प्रिय अडानी। जी हाँ, अडानी कंसोर्टियम ने इसे ले लिया है और 1200 मेगावाट का उनका थर्मल पावर प्लांट भी अब अडानी का हो गया है।
सबसे खतरनाक और शॉकिंग चीज तो अभी आपको जानना बचा ही है, जब यह सब कुछ हो जाता है, उसके बाद मई 2026 में ईडी और सीबीआई दोनों के केस कोर्ट में रद्द हो जाते हैं, उनके खिलाफ केस चलने तक के सबूत नहीं थे। और उद्योगपति अहमद बुहारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, किंतु अब उनकी कंपनी, थर्मल पावर प्लांट अडानी के हो चुके हैं जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में फिर से लड़ाई शुरू की है। इसके पहले मुंबई एयरपोर्ट जीवीकेवी और एनडीटीवी के साथ भी यही हुआ था, दोनों पर पहले एजेंसियों ने कार्रवाई की और फिर अडानी से हाथ मिला और उसका अधिग्रहण हो गया। ऐसे अब बहुत से उदाहरण हो चुके हैं। तो यह स्थिति है अब भारत में उद्योगपतियों की, फिर आप बोलते हो रुपयों के यह हालात कैसे हो गए, पिछले 22 महीनों से एक रुपये का विदेशी निवेश क्यूँ नहीं आ रहा? क्योंकि उद्योपति मूर्ख नहीं हैं, वे सब देख समझ रहे थे बहुत समय से कि क्या हो रहा है भारत में, और कैसे 2-3 उद्योगपतियों को ही पूरा मार्केट व उद्योग दे दिए जा रहे हैं, पूरा सरकारी सिस्टम केवल उनके लिए काम कर रहा है।
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