विविध संघठनों एंव जाग्रुत मंच ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर तहसीलदारों के ज़रिए डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को एक विज्ञापन सौंपा।
शनिवार, 25 जुलाई 2026
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स्टूडेंट्स के खिलाफ हिंसा और NEET पेपर लीक के विरोध में तुमसरा में बड़ा मार्च।
दिगंबर देशभ्राता
"साप्ताहिक जनता की आवाज़"
भंडारा/तुमसर 24 जुलाई :- देश भर में कॉम्पिटिटिव परिक्षाएं में पेपर चीटिंग की लगातार घटनाओं, एजुकेशन सिस्टम में करप्शन और शांति से प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स पर हो रही अमानवीय हिंसा के विरोध में 'विभिन्न संघठनोएं, 'जागरूक नागरिक मंच, तुमसर' ने शहर में एक बड़ा मार्च निकाला।
इस मार्च के ज़रिए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की ज़ोरदार मांग की गई, और सब-डिविजनल ऑफिसर गणेश दिघे के ज़रिए डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को मांगों का एक मेमोरेंडम सौंपा गया। यह मार्च शहर के मातोश्री लॉन से शुरू होकर तुमसर के तहसील ऑफिस पहुंचा।
इस मार्च में पूर्व MLA चरण वाघमारे समेत बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स, अलग-अलग सोशल ऑर्गनाइज़ेशन के पदाधिकारी और लोकल नागरिक शामिल हुए।
एडमिनिस्ट्रेशन को दिए गए एक बयान में, प्रोटेस्ट करने वालों ने अपना कड़ा गुस्सा ज़ाहिर किया है। फोरम ने गंभीर आरोप लगाया है कि हाल के दिनों में स्टूडेंट्स पर पुलिस की हिंसा सरकार द्वारा स्पॉन्सर्ड है। इसमें पॉलिटिकल गुंडों का शामिल होना बहुत निंदनीय है, और यह काम सरकार के खिलाफ है। भारतीय लोकतंत्र के उसूलों के खिलाफ बयान में कहा गया कि संविधान और आम आदमी के बुनियादी अधिकारों को कुचला जा रहा है। एग्जामिनेशन सिस्टम में खामियों और पेपर लीक की वजह से स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है, उससे लाखों स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में बहुत गुस्सा है। प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक ट्रांसपेरेंट और क्वालिटी वाला एग्जामिनेशन सिस्टम स्टूडेंट्स का बुनियादी अधिकार है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा में भ्रष्टाचार की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। एग्जामिनेशन पेपर लीक के सभी लगातार मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दोषी अधिकारियों, संस्थानों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
भविष्य में पेपर लीक को रोकने के लिए तुरंत टेक्निकल और एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार लागू किए जाने चाहिए। सरकार को शिक्षा का प्राइवेटाइज़ेशन रोककर सभी को एक जैसी, मुफ़्त और क्वालिटी वाली शिक्षा देने की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। स्टूडेंट्स के शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए ज़रूरी पॉलिसी फ़ैसले लिए जाने चाहिए।
यह भी मांग की गई कि यह बयान तुरंत भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को भेजा जाए। साथ ही, ऊपर बताई गई मांगों पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। जागरूक नागरिक मंच और मौजूद स्टूडेंट्स ने एडमिनिस्ट्रेशन को चेतावनी दी है कि अगर इंसाफ नहीं मिला तो भविष्य में डेमोक्रेटिक तरीकों से इस प्रोटेस्ट को और तेज़ किया जाएगा।
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