पुण्यतिथी निमित्य..
शनिवार, 4 जुलाई 2026
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राष्ट्रीय जागरूकता के नायक, युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत!..
प्रदिप कडबे.
नागपुर (वि.प्र) :- 4 जुलाई वह दिन है भारत के आध्यात्मिक और बौद्धिक इतिहास में यह एक अत्यंत भावुक दिन है। 1902 में इसी दिन, महज 39 वर्ष की आयु में, महान विचारक, राष्ट्र संत और युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद ने महासमाधि ग्रहण की थी। हम इस दिन को उनकी पुण्यतिथि के रूप में अत्यंत श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ मनाते हैं। स्वामीजी का संदेश, 'उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक न रुको', युवाओं को ऊर्जा प्रदान करता है। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। रामकृष्ण परमहंस के संपर्क में आने के बाद उनके जीवन ने एक नया मोड़ लिया। स्वामीजी ने न केवल भारत की आध्यात्मिक विरासत को पुनर्जीवित किया, बल्कि इसे अत्यंत गर्व के साथ विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया। 1893 में, अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म परिषद में दिया गया उनका भाषण विश्व इतिहास में अमर हो गया। 'मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों...' इन शब्दों से उन्होंने पूरे हॉल का दिल जीत लिया और पश्चिमी जगत को भारतीय वेदांत और संस्कृति से परिचित कराया।
आज स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि है, जिसे लाखों लोग याद कर रहे हैं।
केवल स्वामी विवेकानन्द
वे आध्यात्मिक नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और समाज सुधारक थे। उन्होंने जीवन भर देश से गरीबी, अज्ञानता और अंधविश्वास को मिटाने का भरसक प्रयास किया। मानवता की सेवा को ही ईश्वर की सच्ची सेवा मानते हुए उन्होंने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की। उन्हें युवाओं पर अटूट विश्वास था। उनका मानना था कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में सुरक्षित है।
उन्होंने यह विचार व्यक्त किया कि केवल चरित्रवान, बलवान और बुद्धिमान युवा ही देश का विकास कर सकते हैं। स्वामीजी के
उनकी महासमाधि को एक शताब्दी से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। आज के युवा जब निराश या भ्रमित होते हैं, तो स्वामीजी का साहित्य उन्हें सही राह दिखाता है। उन्होंने धर्म और विज्ञान को मिलाकर आधुनिक भारत की नींव रखी।
4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते समय, केवल उनकी प्रतिमा की पूजा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके विचारों को अपने दैनिक जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। स्वामी विवेकानंद के कार्य और विचार भारत और संपूर्ण विश्व का शाश्वत मार्गदर्शन करते रहेंगे.
प्रदिप कडबे.
लोक शहीर,पत्रकार
कीरणापूर,ता.रामटेक जि.नागपूर
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