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  शहर एवं गांव के युवा नशे की,गिरफ्त में.

शहर एवं गांव के युवा नशे की,गिरफ्त में.


 • नाबालिग भी खर्च करने के आदी;खर्रा/घुटका खाने और सिगरेट पीने का फ़ैशन बढ़ा.

साप्ताहिक "जनता की आवाज़" 
        संवाददाता

तुमसर :- हाल ही में शहर ऐंव गांव के इलाकों में नशे की दर सबसे ज़्यादा बढ़ी है। बेरोज़गारी और पैसे की तंगी की वजह से कई युवा नशे की गिरफ़्त में आ रहे हैं। पढ़ाई की उम्र में हाथों में किताबों की जगह खर्रा,घुटका, सिगरेट और दोस्तों का साथ नशे की ओर खींच रहा है, गांव के इलाकों में युवा पीढ़ी की यह तस्वीर चिंताजनक होती जा रही है।
 नाबालिग बच्चे भी खर्र के शिकार हो रहे हैं और सिगरेट पीने को फ़ैशन समझने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है। आसानी से मिलने वाले तंबाकू प्रोडक्ट्स, दोस्तों के असर और नशे के बुरे असर को नज़रअंदाज़ करने की वजह से शहर एव गांव के युवाओं की सेहत और भविष्य खतरे में पड़ रहा है। कुछ जगहों पर तो स्कूल-कॉलेज के आस-पास भी तंबाकू प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे माता-पिता और समाज की चिंता बढ़ गई है।
नशा अब नहीं छूटता, अगर बचपन में किसी ने सिगरेट पीना छोड़ दिया होता तो आज मुझे इसकी लत होती।

शहर एवं गांव में हाथ से बनी भट्टियां, देसी-विदेशी शराब: गांव छोटा हो या बड़ा; लेकिन, उस जगह हाथ से बनी शराब और देसी शराब बड़े पैमाने पर बिक्री के 
 उपलब्ध है। इस वजह से शहर एवं गांव में नाबालिग बच्चे शराब के आदी हो रहे हैं। उनके लिए कोई काम नहीं है। चूंकि चार लोग बार-बार खांस रहे हैं, इसलिए उनके सामने खड़ा होना मुश्किल है। बेटा-बाप एक ही खर्रा खाते हैं। कभी-कभी, खर्रा खाने वाले युवा कुछ दिनों बाद अपने रिश्तेदारों के पास आ जाते हैं। हालांकि, तब भी, चूंकि युवा किसी की परवाह नहीं करते, इसलिए उनकी हिम्मत बढ़ जाती है।

 कुछ दिनों के बाद, ग्रामीण इलाकों में एक ही खर्रा खाते हुए पिता-पुत्र की तस्वीर देखने को मिलती है। जब उन्हें 300 से 400 की मजदूरी मिलती है, तो वे शराब के भट्ठे पर पहुंच जाते हैं। नशे के आदी युवा अपने शौक पूरे करने के लिए छोटी-बड़ी नौकरियां करने लगते हैं। देखा जाता है कि वे दिन भर काम करने के बाद जो पैसे कमाते हैं, उसे घर ले जाने से पहले शराब की दुकान से 2-4 घूंट लेते हैं। 
शहर एवं ग्रामीण इलाकों में युवाओं में तंबाकू, खर्रा, गुटखा और सिगरेट की लत की बढ़ती दर चिंताजनक है। कम उम्र में लत लगने से युवाओं की शारीरिक और मानसिक सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। तंबाकू प्रोडक्ट्स के सेवन से मुंह का कैंसर, दिल की बीमारी और दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, माता-पिता को अपने बच्चों की आदतों पर ध्यान देने की ज़रूरत है।

समाजसेवक श्रीकृष्ण देशभ्रतार 
        मुख्य संपादक 
साप्ता. "जनता की आवाज़"

फिर भी, किसी के खेत से सामान या फसल चुराकर नशा करने की लत बढ़ी है। इसमें शामिल होने वालों की संख्या
रोज़ाना के खर्चों में बढ़ोतरी: नशे के आदी युवा अपनी सुबह की शुरुआत खर्रा, तंबाकू या शराब से करते हैं

मुझमें हिम्मत नहीं है। मैं कई महीनों से नशा छोड़ने की कोशिश कर रहा हूँ।

यह था। अगर आप रोज़ाना पान की टपरी से बैन गुटखा खरीदते हैं, तो आपको कम से कम 10 से 15 रुपये में 3 पीस मिलते हैं। इस हिसाब से एक दिन में गुटखे पर 100 से 150 रुपये खर्च होते हैं। महीने में अकेले गुटखे पर 3 से 4 हज़ार रुपये खर्च होते हैं।
हालांकि, नशे के आदी युवाओं ने इसमें नाकामी पर रिएक्शन दिया।

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