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"अगर मुझे सस्पेंड भी कर दिया जाए तो भी मैं ठीक रहूंगी!

"अगर मुझे सस्पेंड भी कर दिया जाए तो भी मैं ठीक रहूंगी!



"मैं माफी नहीं मांगूंगी!"

• माधवी जाधव बाबासाहेब के सम्मान के लिए खड़ी हुईं।

"साप्ता.जनता की आवाज़"
 न्यूज़ नेटवर्क

नासिक :- 26 जनवरी रिपब्लिक डे। देश के संविधान की बड़ाई करने का दिन। लेकिन, उसी दिन नासिक में हुए ऑफिशियल प्रोग्राम में एक गंभीर सवाल उठा, जब स्पीच में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का नाम नहीं लिया गया।

हर नागरिक को सीधे और पब्लिकली सवाल पूछने और अपनी बात रखने का हक है। यह एक डेमोक्रेटिक वैल्यू है, और रिपब्लिक डे प्रोग्राम में डेमोक्रेसी पर सवाल उठाना इसका एक हिस्सा है।

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की एक महिला कर्मचारी माधवी जाधव स्पीच के दौरान खड़ी हुईं और सीधे गार्डियन मिनिस्टर गिरीश महाजन से सवाल किया। उन्होंने पूछा, "क्या संविधान देने वाले और डेमोक्रेसी बनाने वाले बाबासाहेब का नाम न लेना गलती नहीं है?"

इस बोल्ड सवाल के बाद प्रोग्राम में अफरा-तफरी मच गई। एडमिनिस्ट्रेशन ने दखल दिया और माधवी जाधव को पुलिस कस्टडी में ले लिया गया। हालांकि, पुलिस एक्शन से ज़्यादा उनकी बातों ने पूरे राज्य का ध्यान खींचा। रिपब्लिक डे के पवित्र दिन पर एक महिला कर्मचारी ने सीधे मंत्रियों से सवाल किया कि उन्होंने अपने भाषण में संविधान बनाने वाले डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का नाम क्यों नहीं लिया।

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की कर्मचारी माधवी जाधव ने गार्डियन मिनिस्टर गिरीश महाजन के भाषण के दौरान सवाल उठाया। उन्होंने सीधे पूछा, "अगर संविधान बनाने वाले का नाम नहीं है, तो रिपब्लिक डे का क्या मतलब है?"

इस घटना के बाद कुछ देर के लिए जगह पर टेंशन हो गई। वहां मौजूद पुलिस ने माधवी जाधव को कस्टडी में ले लिया। हालांकि, उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "भले ही मुझे सस्पेंड कर दिया जाए, मैं बाबासाहेब के सम्मान के लिए माफी नहीं मांगूंगी।"

"मुझे कोई भी काम दे दो, लेकिन मैं बाबासाहेब की पहचान मिटने नहीं दूंगी"

माधवी जाधव ने बाद में अपना रुख साफ किया,

"भले ही मुझे सस्पेंड कर दिया जाए, मैं बाबासाहेब के सम्मान के लिए माफी नहीं मांगूंगी। “भले ही वे मुझसे रेत के ट्रक उतरवाएं, मिट्टी का काम करवाएं, मैं करूंगी। लेकिन मैं बाबा साहेब की पहचान मिटने नहीं दूंगी।”

उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्होंने पब्लिसिटी या मीडिया के लिए नहीं, बल्कि संविधान के सम्मान के लिए यह बात कही थी।

मंत्री गिरीश महाजन की सफाई पूरी - “साप्त.जनता की आवाज़”

घटना के बाद गिरीश महाजन ने साफ किया कि डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर का नाम उनके भाषण में अनजाने में नहीं लिया गया था और इसके पीछे कोई इरादा नहीं था। उन्होंने अफसोस भी जताया। एक जिम्मेदार व्यक्ति की यह गलती उनकी ब्राह्मणवादी सोच की निशानी है। आज हर कोई इस बात से सहमत है कि आज जो हुआ और उन्होंने जो किया वह निंदनीय है और “सप्त. जनता की आवाज़” इस घटना की निंदा करता है।

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