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आज का सुविचार

आज का सुविचार


मान्यवर दीनाभाना बाल्मीकि।

  संकलन/संग्रहक
 हर्षवर्धन देशभ्रतार  

जन्म 28 फरवरी 1928,परिनिर्वाण दिवस 29 अगस्त 2006

बामसेफ के संस्थापक सदस्य मान्यवर दीना भाना जी का जन्म राजस्थान में 28 फरवरी 1928 जयपुर में बाल्मीकि परिवार में हुआ। कांशी राम और बाबा साहेब के विचारों से प्रेरित थे।पूरे देश में जय भीम ,जय मूलनिवासी की आग लगी थी। उसमें चिंगारी दीना भाना ने लगाई। यह जिद्दी किस्म के शख्स थे। पिताजी सवर्णों के यहां दूध निकालने का काम करते। उनकी भी भैंस पालने की इच्छा की लेकिन स्वर्ण समाज को यह सहन नहीं हुआ कि तुम सूअर पालने वाले भैंस पालने की बात करते हो ।इसीलिए अत्यधिक दबाव के कारण भैंस बेच दी। यह बात दीना भाना को चुभ गई।
      वहां उन्होंने बाबासाहेब के भाषण सुनकर कहने लगे यही वह शख्स है जो देश में जातिवाद खत्म कर सकता है। बाबासाहेब के निर्वाण के बाद वे पूना आ गए और गोला बारूद फैक्ट्री DRDO मैं सफाई कर्मचारी के रूप में नौकरी कर ली ।जहां मान्यवर कांशीराम जी से भेंट हुई।
       उस समय अंबेडकर जयंती की वजह से उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया। हंगामा होने की वजह से उस समय काशीराम जी को पता नहीं था कि बाबा साहेब कौन है। जिनकी जयंती की वजह से उनकी नौकरी चली गई। दीना भाना जी उनके साथ विभाग में कार्यरत थे ।महार जाति में जन्मे नागपुर निवासी मान्यवर डी के खापर्डे जी बामसेफ के द्वितीय संस्थापक सदस्य थे। उन्होंने बाबासाहेब की पुस्तक जाति विच्छेद काशीराम जी ने रात भर कई बार पढ़ी। और कहा की दीना भाना को छुट्टी ना देने वालों की जब तक मैं छुट्टी ना ना कर दूं तब तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा।
      कांशीराम ने भी नौकरी छोड़ दी ।यदि दीना भाना ना होते तो बामसेफ ना होता। और ना ही व्यवस्था परिवर्तन हेतु अंबेडकरवादी आंदोलन चल रहा होता ।
       इनका परिनिर्वाण पुणे में 29 अगस्त 2006 को हुआ था। इस देश में जय भीम का नारा भी गायब हो गया होता और ना आज ब्राह्मणों की नाक में दम करने वाला जय मूलनिवासी मान्यवर दीना भाना वाल्मीकि ना होता। 

      मोती राम MA
      SHAHDARA 
       पूर्व अधिकारी 
        9910160521

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