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केंद्र सरकार और आरएसएस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

केंद्र सरकार और आरएसएस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन


वंचित बहुजन आघाडी और कांग्रेस ने नागपुर में निकला विशाल जन आक्रोश मोर्चा.

"साप्ताहिक जनता की आवाज"
 वृत्तपत्र प्रतिनिधी  

नागपुर/भंडारा :- उपराजधानी में आक्रोश संयुक्त मोर्चा के माध्यम से सोमवार, 23 मार्च को विशाल जन राष्ट्रीय संघ स्वयंसेवक (आरएसएस) और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ तीव्र विरोध प्रदर्शन किया गया. संविधान चौक पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित हुए. वंचित बहुजन आघाड़ी, कांग्रेस और अन्य समविचारी दलों के संयुक्त तत्वावधान में निकाले गए इस विराट मोर्चे से शहर का राजनीतिक माहौल गरमा गया.

मोर्चे में वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ, विधायक विकास ठाकरे सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे. प्रदर्शनकारियों ने संविधान, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाते हुए केंद्र सरकार और आरएसएस की भूमिका पर सवाल खड़े किए. आंदोलनकारियों ने पूछा कि देशभक्ति और नैतिकता का दावा करने वाला संघ मौजूदा घटनाओं पर मौन क्यों है ?

केंद्र सरकार पर तीखा हमला

मोर्चे के दौरान कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाळ ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, अच्छे

दिनों का वादा करने वाली सरकार ने जनता को धोखा दिया है. बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असमानता बढ़ रही है, जबकि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है.

आरएसएस नेतृत्व पर भी सवाल प्रदर्शन के दौरान आरएसएस की भूमिका को लेकर भी आलोचना की गई. सरसंघचालक मोहन भागवत की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए आंदोलनकारियों ने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से संविधान और तिरंगा सौंपने आए थे, फिर संवाद से परहेज क्यों किया गया ?

मनुस्मृति बनाम संविधान का मुद्दा प्रमुख

मोर्चे में मनुस्मृति बनाम संविधान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया. नेताओं ने सामाजिक समता, न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का

के खिलाफ

विशाल जन आक्रोश

संकल्प व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हमारे हाथ में संविधान है और हम उसी के रास्ते पर चलकर लड़ाई लड़ेंगे.

प्रधानमंत्री से मांगा इस्तीफा और संस्थाओं पर दबाव के आरोप

मोर्चे के अंत में कुछ वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की. साथ ही चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव होने का भी आरोप लगाया गया.

इसके अलावा राज्य सरकार से भी सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई. इस मोर्चे से नागपुर के राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और आने वाले समय में इन मुद्दों पर राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.

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