दोषी अधिकारी के निलंबन से लेकर वसूली और उच्च स्तरीय जांच की मांग.
शुक्रवार, 12 जून 2026
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घोटाला - तुमसर रोपवाटिका के 50 प्रतिशत पौधे नष्ट.
दिगंबर देशभ्रतार
"साप्ताहिक जनता की आवाज" संवाददाता |
भंडारा/तुमसर :- तहसील के डोंगरला स्थित शासकीय नर्सरी में हजारों पौधों के नष्ट होने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। तत्कालीन वनपरिक्षेत्र अधिकारी नितेश धनविजय पर की गई कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। वन विभाग ने उन्हें दोषी मानते हुए दो साल तक वेतनवृद्धि रोकने की सजा दी है, किंतु शिकायतकर्ता अमित मेश्राम ने इसे हल्की सजा करार देते हुए फिर से अपर मुख्य सचिव (वन) को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मग्रारोहयो योजना के तहत डोंगरला नर्सरी में तैयार किए गए 50 हजार पौधों में से 24 हजार 853 पौधे नष्ट होने का मामला सामने आया था। आरोप है कि, योजना में लापरवाही, रखरखाव की कमी और सरकारी निधि के दुरुपयोग के कारण यह नुकसान हुआ। इस संबंध में 4 अगस्त 2025 को 'आपले सरकार' पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। जांच के बाद वन विभाग ने 25 मई 2026 को आदेश जारी कर तत्कालीन अधिकारी नितेश धनविजय को दोषी ठहराया और दो साल तक वेतनवृद्धि रोकने की सजा दी। हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि, इतने बड़े नुकसान के मुकाबले यह कार्रवाई नाकाफी है। इस पूरे मामले से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि, शासन इस मामले में सख्त कदम उठाता है, या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इस पर पूरे तुमसर क्षेत्र की नजर टिकी है।
दोषी अधिकारी से नुकसान की वसूली
की मांग : दोषी
अधिकारी का तत्काल निलंबन किया जाए। नष्ट 24 हजार 853 पौधों की लागत मजदूरी व सामग्री खर्च दोषि अधिकारी से वसूला जाए। विभागीय आयुक्त स्तर या स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच की जाए। पौध वितरण और रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट किया जाए।
ऑनलाइन रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप: शिकायतकर्ता के मुताबिक संबंधित
अधिकारी ने एनएमआईएस ऑनलाइन सिस्टम में 33 हजार 33 पौधों के उपयोग और 16 हजार 625 पौधों के नष्ट होने की जानकारी अपलोड की थी। जबकि जांच में 24 हजार 853 पौधे नष्ट पाए गए। नर्सरी रजिस्टर अपडेट नहीं होना, पौधों के नष्ट होने के अलग-अलग आंकड़े और वितरण रिकॉर्ड में गड़बड़ी के चलते आर्थिक अनियमितता की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की थर्ड पार्टी ऑडिट से जांच कराने की मांग की है।
वनपरिक्षेत्राधिकारी का रोका वेतन
वनपरिक्षेत्र अधिकारी नितेश धनविजय को दो साल तक वेतनवृद्धि रोकने की सजा दी गई है। यह छोटी कार्रवाई नहीं, बल्कि शासकीय सेवा में गंभीर दंड माना जाता है। उनकी लापरवाही के कारण ही यह कार्रवाई की गई है।
- मनोज चव्हाण, उपवनसंरक्षक, भंडारा
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